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भारत में न्यायालय कार्रवाई की अवधि

भारत में न्यायालय कार्रवाई कितनी लंबी चलती है? भारत में वर्तमान में लंबित सबसे पुराना मामला वर्ष 1878 का है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 10 साल तक चलने वाली कार्यवाही असामान्य नहीं है।

भारत में कार्यवाही इतनी लंबी क्यों चलती है

भारतीय न्याय प्रणाली लंबित मामलों के काफी बड़े बैकलॉग के लिए जानी जाती है। बड़ी संख्या में खुले मामले, सीमित क्षमता और कई स्तरों वाली अपील प्रणाली के कारण दीवानी कार्यवाही कई वर्षों तक खिंच सकती है। विदेशी वादियों के लिए यह कठिनाई और बढ़ जाती है कि भाषा, कानूनी आधार और प्रक्रियागत तरीके जर्मनी में प्रचलित तरीकों से काफी भिन्न हैं।

DRC Systems के मामले में प्रासंगिकता

DRC Systems के संदर्भ में यह प्रासंगिक है कि कंपनी ने शुरू में अपना मुख्यालय न्यूयॉर्क में होने का दावा किया था। Manager Mahesh Sutariya ने बाद में स्पष्ट किया कि यह केवल एक “Affiliate Partner” था। जून 2017 के कुछ समय बाद DRC Systems की वेबसाइट से “मुख्यालय” का उल्लेख हटा दिया गया।

भारतीय कानूनी प्रणाली के माध्यम से किसी भारतीय कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में लंबी कार्यवाही और भिन्न कानूनी ढांचे के कारण काफी प्रयास लगता है।

जो कोई किसी भारतीय अनुबंध-साझेदार के साथ विवाद में फंसता है, उसे शुरुआत से ही अपेक्षित कार्यवाही अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। अनुबंध में पहले से तय किया गया मध्यस्थता (Arbitration) खंड या भारत के बाहर का न्यायाधिकार दावों को लागू करना काफी आसान बना सकता है — बाद में इसमें कुछ भी बदलना संभव नहीं रह जाता।

सूचना: यह लेख हमारा अपना आकलन प्रस्तुत करता है और कानूनी सलाह नहीं है।